क्यों अमेरिका-ब्रिटेन के धनिक पाकिस्तान से दूर और भारत के करीब जा रहे हैं ? क्योंकि पाकिस्तान मिशनरीज को भगा रहा है जबकि भारत उनका स्वागत कर रहा है !!

अमेरिका-ब्रिटेन के धनिकों के कई उद्देश्य हैं – जैसे कि भारत, पकिस्तान आदि सभी देशों में गणित –विज्ञान शिक्षा को तबाह करना आदि और फिर उनकी सारी खनिज संपदा को लूटना और सभी बैंकों को स्वामित्व पाना और ऐसे और भी 
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साथ में इन धनिकों का एक और उद्देश्य भी है – सभी मूल धर्मों को मिटाना और उन्हें पश्चिमी धर्म से बदलना 
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तो अमेरिका-ब्रिटेन के धनिकों ने भारत और पाकिस्तान के नेताओं/बाबुओं/अधिकारीयों/जजों को आदेश दिया है कि वे 
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(a) मिशनरीज की सुरक्षा करना 
(b) मिशनरीज़ का रोड़ा बनने वाले स्थानिक संतों /मौलवियों को जेल में डालना
(c) स्थानिक धर्मों को कमजोर करने के लिए मंदिरों /मस्जिदों को सरकारी नियंत्रण में लेना 
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भारतीय नेताओं/बाबुओं/अधिकारीयों/जजों ने इसे फटाफट मान लिया | सोनिया/केजरीवाल और कांग्रेस/आप कार्यकर्ता वैसे भी हिन्दू विरोधी और मिशनरीज़ समर्थक हैं | पर मोदीजी और संघ कार्यकर्ताओं ने भी इस आदेश का भी समान रूप से पालन करना शुरू कर दिया और मिशनरीज़ को सुरक्षा देने के साथ स्थानिक संतो जैसे कि संत राम रहीम , संत आशाराम बापू, संत रामपाल आदि को झूठे बलात्कार और हत्या के मुकदमों में फंसाकर जेल में डालना शुरू कर दिया | सोनिया-मोदी-केजरीवाल ने एक के बाद मंदिरों को सरकारी नियंत्रण में लेना शुरू कर दिया | उदहारण – मोदीजी और संघ कार्यकर्ताओं ने हाल ही में महाराष्ट्र के शनि मंदिर को सरकार के नियंत्रण में ले लिया है जिससे हिन्दू धर्म कमजोर हो सके और मिशनरीज मजबूत हो सके |
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और भारतीय नेतृत्व/आईएएस/आईपीएस भारतीय लोगों को इसके लिए विश्वस्त कर पाए कि वे ये सब छोड़कर दूसरी तरफ देखें |
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पाकिस्तानी नेता/बाबू और शीर्ष पुलिस अधिकारी भी बिक गए और मिशनरीज़ को सुरक्षित रखने वाले एजेंडा का पालन करने लगे | लेकिन वे पाकिस्तानी जनता को इसके लिए विश्वस्त नहीं कर पाए कि वे ये सब छोड़कर दूसरी तरफ देखें |
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तो जब पाकिस्तानी नेता/बाबू और शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने मिशनरीज़ को सुरक्षा देने का प्रयास किया तब वे स्थानिक लोगों द्वारा पीट दिए गए | जब उन्होंने स्थानिक मौलवियों को अरेस्ट करने का प्रयास किया जो मिशनरीज़ को रोक रहे थे, तो स्थानिक पुलिसकर्मियों को मार खानी पड़ी और पाकिस्तान सरकार मस्जिदों को टेकओवर करने में विफल हुई | 
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साथ में, जब अमेरिका-ब्रिटेन धनिकों ने इराकी तेल को लूटना शुरू किया और बाद में लीबिया का तेल लूटना शुरू किया, तब पाकिस्तानी लोगों ने सही या गलत रूप से ये मानना शुरू कर दिया कि जल्द ही ये विदेशी धनिक पाकिस्तान को भी लूटना शुरू कर देगा | अमेरिका-ब्रिटेन धनिकों ने कई सारे पेड मीडियावालों को धंदे पर लगा रहा है पाकिस्तानी लोगों को मूर्ख या विशवास दिलाने में कि इराक/लीबिया पर हमला तेल की लूट के लिए नहीं बल्कि लोकतंत्र के लिए किया गया था | लेकिन पाकिस्तानी विश्वस्त नहीं हो सके | जबकि पेड मीडियावाले भारत में बहुत से लोगों को विश्वास दिला पाए कि वे इराक/लीबिया तेल लूट को भूल जाएँ या नजरअंदाज कर दे | 
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और अब पाकिस्तानी लोगों का प्रतिरोध अमेरिका-ब्रिटेन के धनिकों के विरुद्ध दिन व दिन बढ़ रहा है 
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तो निम्न प्रमुख अंतर है अमेरिका–ब्रिटेन के धनिक भारत और पकिस्तान के बीच देखते हैं 
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(1) भारतीयों को विश्वास दिलाया जा सकता है कि वे ये सब ना देखें और मिशनरीज़, हिन्दू संतों की जेल भराई और मंदिरों के सरकार नियंत्रण के साथ चलते रहें | नेताओं को इन सभी 3 कदमों को लेने के मजबूर कर सकते हैं और फिर भी वोटर्स के एक बड़े हिस्से में बहुत लोकप्रिय रहें |
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(2) पाकिस्तानियों ने ये नजरंदाज करने से इनकार किया और मिशनरीज़, उनके मौलवियों की जेल भराई और मस्जिदों के सरकार नियंत्रण के साथ चलते रहें | नेताओं को इन सभी 3 कदमों को लेने के मजबूर कर सकते हैं और लेकिन वे अलोकप्रिय और निष्प्रभावी बन गए |
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(3) भारतियों को अमेरिका की इराक/लीबिया लूट को नजरंदाज करने के लिए विश्वस्त किया जा सकता है |
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(4) पाकिस्तानी विदेशी धनिकों के लिए अमेरिका की इराक/लीबिया लूट के विरुद्ध विरोध कर रहे हैं और रोष उत्पन्न कर रहे हैं |
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तो उपरोक्त 4 कारण है कि क्यों अमेरिका-ब्रिटेन के धनिक पाकिस्तान को कोने में पटककर भारत के साथ काम कर रहे हैं |